भारत में जनजातीय शिक्षा की समस्याएँ एवं उनके समाधान हेतु सुझाव-एक विश्लेषणात्मक अध्ययन (जनपद बहराइच के विशेष सन्दर्भ में)

https://doi.org/10.5281/zenodo.20265197

Authors

  • राजेन्द्र सिंह

Abstract

भारत एक विविधताओं से भरा देश है, जहाँ विभिन्न जाति, भाषा, धर्म, संस्कृति और परंपराएँ साथ-साथ विद्यमान हैं। इनमें जनजातीय समुदाय भारतीय समाज की आधारभूत और प्राचीन इकाइयों में से हैं, जो अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पहचान रखते हैं। स्वतंत्रता के पश्चात् भारत सरकार ने जनजातीय विकास के लिए अनेक योजनाएँ प्रारंभ कीं, किन्तु शिक्षा का क्षेत्र अभी भी इन समुदायों में पिछड़ा हुआ है। जनपद बहराइच, जो उत्तर प्रदेश का सीमावर्ती और अर्धवनाच्छादित क्षेत्र है, यहाँ बड़ी संख्या में थारू, मुसहर, कोल और खरवार जैसी जनजातियाँ निवास करती हैं। इनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शिक्षा का प्रसार यहाँ धीमी गति से हुआ है। इस शोध का उद्देश्य बहराइच जिले की जनजातीय शिक्षा की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण करना, शिक्षा में आ रही प्रमुख बाधाओं की पहचान करना, तथा उनके समाधान हेतु व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत करना है। शोध से यह स्पष्ट हुआ कि यहाँ शिक्षा की स्थिति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं-
भौगोलिक दुर्गमता, गरीबी, शिक्षकों की अनुपलब्धता, भाषा और संस्कृति का अंतर, तथा सरकारी योजनाओं की सीमित पहुँच। जहाँ भी स्थानीय भाषा में शिक्षण, छात्रवृत्ति, छात्रावास सुविधा और सामुदायिक भागीदारी जैसे उपाय किए गए हैं, वहाँ शिक्षा में सुधार देखा गया है। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि जनजातीय शिक्षा के वास्तविक उन्नयन के लिए केवल सरकारी योजनाएँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी, शिक्षक-संवेदनशीलता और स्थानीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा-पद्धति अपनाना आवश्यक है।
कुंजी शब्द- जनजातीय शिक्षा, बहराइच, थारू जनजाति, शिक्षा की समस्याएँ, सरकारी योजनाएँ, सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ, समाधान-सुझाव।

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Published

31.03.2026

How to Cite

राजेन्द्र सिंह. (2026). भारत में जनजातीय शिक्षा की समस्याएँ एवं उनके समाधान हेतु सुझाव-एक विश्लेषणात्मक अध्ययन (जनपद बहराइच के विशेष सन्दर्भ में): https://doi.org/10.5281/zenodo.20265197. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 2(03), 11–19. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/96

Issue

Section

RESEARCH PAPERS