नारी जीवन: लैंगिक समानता और सशक्तीकरण

https://doi.org/10.5281/zenodo.20241614

Authors

  • डॉ0 राजेश कुमार यादव

Abstract

नारी शब्द अपने आप में सरल प्रवाह सा लगता है, जो बड़ी सहजता के साथ ,युगों-युगों से, ढ़ेरो बाधाओ के बीच से बहता चला आ रहा हैं। बहाव के कई पड़ाव पर उतार भी देखे है तो चढ़ाव भी देखा है उसने। बावजूद इसके वह सतत् रूप से बहता चला आ रहा है। आज चारों तरफ इस कदर फैल गया है कि इसकी गूज कभी भी कही भी सुनी व समझी सकती है। नारी शब्द के बिना समाज सदैव अधूरा और सूना बना रहेगा। इस सुनेपन व एकाकीपन से एक स्वस्थ समाज की कल्पना करना भी एक प्रकार की बेइमानी होगी। पुरूष समाज को ये बात कब समझ में आयेगी की बिना लैंगिक समानता और सशक्तीकरण के मानव समाज कभी भी किसी तरह से साकार नही हो सकता। वैसे समझता तो वो भी है परन्तु लगता है जैसे वो जानकर भी अंन्जान बना बैठा है। चाहे जो भी हो खामियाजा तो देर सबेर उसको उठाना तो पड़ेगा ,उसे गलतफहमी में नही जीना चाहीए।
मुख्य शब्द: लैंगिक समानता, सशक्Ÿिाकरण, वैदिक काल, ऋग्वैदिक आदर्श, पुनर्विवाह आदि।

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Published

28.02.2026

How to Cite

डॉ0 राजेश कुमार यादव. (2026). नारी जीवन: लैंगिक समानता और सशक्तीकरण: https://doi.org/10.5281/zenodo.20241614. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 2(02), 11–15. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/89

Issue

Section

RESEARCH PAPERS