गांधी, विज्ञान और तकनीकर: अस्वीकृति या पुनर्व्याख्या?

DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.22985440

Authors

  • रजत मिश्र, डॉ० निलय तिवारी

Abstract

महात्मा गांधी के विज्ञान एवं तकनीक संबंधी विचारों को लेकर लंबे समय से यह बहस होती रही है कि वे आधुनिक विज्ञान और तकनीकी प्रगति के विरोधी थे अथवा उनके प्रति एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते थे। सामान्यतः उनकी कृति हिंद स्वराज में आधुनिक सभ्यता, औद्योगीकरण और मशीनीकरण की आलोचना के आधार पर उन्हें विज्ञान-विरोधी विचारक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन गांधी के लेखन, भाषणों और व्यावहारिक जीवन के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि उनका विरोध विज्ञान या तकनीक के अस्तित्व से नहीं, बल्कि उनके ऐसे उपयोग से था जो मानव कल्याण की उपेक्षा कर शोषण, असमानता और नैतिक पतन को बढ़ावा देता है। गांधी का मानना था कि विज्ञान और तकनीक तभी सार्थक हैं जब वे मनुष्य के जीवन को अधिक मानवीय, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हों। वे ऐसी तकनीक के समर्थक थे जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाए, रोजगार के अवसरों का सृजन करे, श्रम की गरिमा को बनाए रखे तथा प्रकृति के साथ संतुलित संबंध स्थापित करे। इस संदर्भ में उनका यह कथन महत्वपूर्ण है कि श्मैं मशीनों का विरोध नहीं करता, मैं उस मशीन-मानसिकता का विरोध करता हूँ जो मनुष्य को मशीन का दास बना देती है।श्प यह कथन उनके तकनीकी चिंतन की मूल भावना को अभिव्यक्त करता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में गांधी के विज्ञान एवं तकनीक संबंधी दृष्टिकोण का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह निष्कर्ष सामने आता है कि गांधी का चिंतन विज्ञान और तकनीक की अस्वीकृति का नहीं, बल्कि उनके नैतिक, मानवीय और लोककल्याणकारी पुनर्पाठ का पक्षधर है। वर्तमान समय में जब तकनीकी विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संकट, बढ़ती आर्थिक विषमता तथा मानवीय मूल्यों के क्षरण जैसी चुनौतियाँ सामने हैं, तब गांधी का दृष्टिकोण विज्ञान और तकनीक के अधिक उत्तरदायी एवं मानव-केंद्रित उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है।
मुख्य शब्दर- गांधी, विज्ञान, तकनीक, आधुनिकता, हिंद स्वराज, ग्राम स्वराज, नैतिकता, सतत विकास

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Published

31.12.2025

How to Cite

रजत मिश्र, डॉ० निलय तिवारी. (2025). गांधी, विज्ञान और तकनीकर: अस्वीकृति या पुनर्व्याख्या? DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.22985440. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 1(02), 58–67. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/158

Issue

Section

RESEARCH PAPERS