भारत में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों द्वारा गरीबी उन्मूलन के प्रयासों का अवलोकन
DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21744859
Abstract
स्वतंत्रता के बाद के समय में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय सफलता हासिल की है। कृषि के क्षेत्र में हम एक समय आयात पर निर्भर थे अब हम केवल निर्यातक ही नहीं हैं बल्कि विश्व में खाद्यान्न के बडे़ दाताओं में से एक हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, अन्तरिक्ष, संचार और सूचना प्रौद्योगिक जैसे क्षेत्रों में हमारी अग्रणी भूमिका है। इन सबके बावजूद विश्व स्तर पर सबसे अधिक गरीबी हमारे देश में है और इसलिए ग्राम विकास और गरीबी उन्मूलन निरन्तर हमारी राष्ट्रीय विकास नीति के प्रमुख ध्यानाकर्षण क्षेत्रों में से एक है। भारत में ग्राम विकास को मुख्यतः गरीबी उन्मूलन नीतियों के संदर्भ में पहचाना जाता है। शायद ही विश्व के किसी और देश ने गरीबी उन्मूलन पर इतना अधिक समय और संसाधन निवेश किए हैं और इतनी कम सफलता हासिल की होगी जितनी की भारत ने की है। 25 वर्ष से भी अधिक समय से 1973-74 से लेकर 2010-2011 तक गरीबी अनुपात अर्थात कुल आबादी में गरीबी की प्रतिशतता 55 से घटकर केवल 27 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई है। यद्यपि गरीबी की समस्या की गम्भीरता और जटिलता को देखते हुए यह उपलब्धि कम नही है, लेकिन हकीकत यह है कि अन्य देशों, विशेष रूप से चीन और पूर्वी तथा दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में हमारा कार्य संतोषजनक नहीं है।
मुख्य शब्द: ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन, कल्याणकारी योजनाएँ, बेरोजगारी, निर्धनता एवं स्वास्थ्य।
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