भारत में कुपोषण उन्मूलन हेतु पोषण अभियानों की प्रभावशीलताः एक विश्लेषण
DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21470616
Abstract
कुपोषण भारत के समक्ष उपस्थित सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों में से एक है। यह केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि मानव पूंजी निर्माण, आर्थिक उत्पादकता, शैक्षिक उपलब्धि तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति से भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता के पश्चात भारत सरकार ने मातृ एवं शिशु पोषण सुधार हेतु अनेक योजनाएँ एवं कार्यक्रम प्रारम्भ किए, जिनमें एकीकृत बाल विकास सेवा, राष्ट्रीय पोषण नीति (1993), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013), पोषण अभियान, एनीमिया मुक्त भारत, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण तथा हाल में पोषण 2.0 जैसी प्रमुख पहलें सम्मिलित हैं। इन अभियानों का उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार, बौनापन, अल्पवजन, क्षीणता तथा एनीमिया में कमी लाना है। यह शोध-पत्र भारत में संचालित प्रमुख पोषण अभियानों की प्रभावशीलता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन मुख्यतः द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित है, जिनमें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, नीति आयोग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध अध्ययनों के आँकड़ों का उपयोग किया गया है।
अध्ययन में तुलनात्मक, वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति का प्रयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पोषण अभियानों के कारण संस्थागत प्रसव, स्तनपान जागरूकता, पूरक पोषण सेवाओं, डिजिटल निगरानी तथा बहु-क्षेत्रीय समन्वय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कई राज्यों में बच्चों के बौनापन एवं अल्पवजन की दरों में कमी भी दर्ज की गई है। इसके बावजूद सामाजिक असमानता, गरीबी, स्वच्छता की कमी, महिला शिक्षा का निम्न स्तर, व्यवहारगत चुनौतियाँ, प्रशासनिक अक्षमताएँ तथा राज्यों के मध्य क्षेत्रीय विषमताएँ इन अभियानों की प्रभावशीलता को सीमित करती हैं। अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि केवल खाद्य सहायता प्रदान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पोषण-संवेदनशील कृषि, महिला सशक्तिकरण, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तथा समुदाय आधारित व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रमों को एकीकृत रूप से लागू करना आवश्यक है। यदि इन अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तो भारत कुपोषण उन्मूलन के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्य-2 एवं लक्ष्य-3, की प्राप्ति की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है।
प्रमुख शब्द - कुपोषण, पोषण अभियान, पोषण 2.0, प्ब्क्ैए प्रधानमंत्री पोषण योजना, एनीमिया मुक्त भारत, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सतत विकास लक्ष्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य।
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