गांधीवाद और उसका राजनीतिक महत्वः समकालीन भारतीय लोकतंत्र एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21470546
Abstract
महात्मा गांधी का राजनीतिक दर्शन केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने विश्व राजनीति, लोकतंत्र, मानवाधिकार, सामाजिक न्याय तथा शांति स्थापना के क्षेत्र में भी गहरा प्रभाव छोड़ा। गांधीवाद सत्य, अहिंसा, प्रेम, आत्मबल, स्वराज, सर्वाेदय, ट्रस्टीशिप, विकेंद्रीकरण, ग्राम स्वराज, नैतिक राजनीति तथा सर्वधर्म समभाव जैसे सिद्धांतों पर आधारित एक समग्र जीवन-दर्शन है। गांधीजी ने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का साधन न मानकर नैतिकता एवं लोककल्याण का माध्यम माना। उनके अनुसार राजनीति धर्म से पृथक नहीं हो सकती, क्योंकि धर्म का आशय नैतिक मूल्यों से है, न कि संप्रदाय विशेष से। इसी कारण गांधीवादी राजनीति में सत्य, पारदर्शिता, सेवा, उत्तरदायित्व और जनसहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। वर्तमान समय में जब लोकतांत्रिक संस्थाएँ अनेक चुनौतियों जैसे राजनीतिक ध्रुवीकरण, भ्रष्टाचार, हिंसा, सामाजिक असमानता, पर्यावरण संकट, उपभोक्तावाद तथा नैतिक मूल्यों के ह्रासकृका सामना कर रही हैं, तब गांधीवादी विचारधारा पुनः प्रासंगिक होती दिखाई देती है। गांधी का सत्याग्रह केवल औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष का साधन नहीं था, बल्कि वह अन्याय, शोषण एवं असमानता के विरुद्ध अहिंसक प्रतिरोध की सार्वभौमिक पद्धति है। आज विश्व के अनेक देशों में नागरिक अधिकार आंदोलनों, पर्यावरण संरक्षण अभियानों, सामाजिक न्याय आंदोलनों तथा मानवाधिकार संघर्षों में गांधीवादी सिद्धांतों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह शोध-पत्र गांधीवाद की वैचारिक पृष्ठभूमि, उसके राजनीतिक महत्व तथा समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन में गुणात्मक शोध पद्धति का प्रयोग किया गया है तथा द्वितीयक स्रोतों पुस्तकों, शोध-पत्रों, सरकारी दस्तावेजों, आयोगों की रिपोर्टों एवं प्रतिष्ठित जर्नलों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि गांधीवाद केवल ऐतिहासिक विचारधारा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए भी एक प्रभावी नैतिक एवं व्यावहारिक मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। यदि शासन व्यवस्था, सार्वजनिक नीति तथा राजनीतिक नेतृत्व में गांधीवादी मूल्यों को समुचित स्थान दिया जाए, तो लोकतंत्र अधिक उत्तरदायी, समावेशी, पारदर्शी एवं जनोन्मुख बन सकता है।
प्रमुख शब्द- गांधीवाद, सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वराज, सर्वाेदय, ग्राम स्वराज, नैतिक राजनीति, लोकतंत्र, विकेंद्रीकरण, ट्रस्टीशिप, सामाजिक न्याय, जनसहभागिता, सुशासन, मानवाधिकार
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