साक्षर बेटी, सशक्त परिवार

DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21389698

Authors

  • डॉ0 स्मिता सिंह

Abstract

साक्षर बेटी, सशक्त परिवार केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, लैंगिक समानता तथा सतत् विकास की आधारशिला है। किसी भी समाज की प्रगति उसकी महिलाओं की शिक्षा के स्तर पर निर्भर करती है। जब एक बेटी शिक्षित होती है, तो वह न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनती है, बल्कि अपने परिवार, समुदाय और राष्ट्र के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। शिक्षित बेटियाँ परिवार में स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, आर्थिक प्रबंधन, बाल शिक्षा तथा सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का प्रसार करती हैं। इसके परिणामस्वरूप परिवार का जीवन स्तर सुधरता है, बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव और अशिक्षा जैसी सामाजिक समस्याओं में कमी आती है तथा महिलाओं की निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ती है। भारत सरकार द्वारा संचालित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, समग्र शिक्षा अभियान तथा महिला सशक्तिकरण से संबंधित विभिन्न योजनाओं ने बालिका शिक्षा को नई दिशा प्रदान की है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक विषमताओं, सामाजिक रूढ़ियों तथा डिजिटल असमानता जैसी चुनौतियाँ अभी भी बालिका शिक्षा के मार्ग में बाधा बनी हुई हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक संगठनों की सामूहिक सहभागिता से संभव है। यह अध्ययन बालिका शिक्षा और परिवार के सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक सशक्तिकरण के मध्य संबंध का विश्लेषण करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि शिक्षित बेटियाँ परिवार की आय, स्वास्थ्य, सामाजिक प्रतिष्ठा और अगली पीढ़ी की शिक्षा में सकारात्मक योगदान देती हैं। अतः बालिका शिक्षा में किया गया निवेश वास्तव में राष्ट्र के भविष्य में किया गया निवेश है। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि साक्षर बेटी ही सशक्त परिवार, समृद्ध समाज और विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला है।
प्रमुख शब्द - साक्षर बेटी, महिला शिक्षा, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सशक्त परिवार, लैंगिक समानता, सामाजिक विकास, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

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Published

30.06.2026

How to Cite

डॉ0 स्मिता सिंह. (2026). साक्षर बेटी, सशक्त परिवार: DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21389698. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 2(05), 84–89. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/141

Issue

Section

RESEARCH PAPERS