भारतीय विदेशी व्यापार नीति परिवर्तन के विभिन्न चरण-एक परिचय
DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21389344
Abstract
स्वतंत्रता के बाद से ही भारत की विदेश नीति विश्व से मित्रवत एवं भाईचारे की तथा सहयोग पर आधारित रही है। इसी के परिणाम स्वरूप भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखते हुए अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परस्पर न्यायपूर्ण तथा सम्मानजनक संबंधों को बनाए रखने में अग्रणी देशों में रहा है। भारतीय विदेश नीति के दृष्टिगत, दक्षिण एशियाई देश एक महत्वपूर्ण भू-भाग है। इस क्षेत्र पर अमेरिका, यूरोप, चीन तथा रुस की दृष्टि बनी रहती है, क्योंकि इस क्षेत्र के देश-विकासशील गैर- विकसित की श्रेणी में आने के बाद भी उपभोक्ता बाजार की दृष्टि से विशाल जनसंख्या वाले देश हैं। भौगोलिक दृष्टिकोण से दक्षिण एशिया विश्व के कुल क्षेत्रफल का करीब 3.5ः है, जबकि लगभग 25ः जनसंख्या निवास करती है। इन देशों की सीमाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई है, इन देशों की सामाजिक- सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक जैसे हैं, किंतु इन देशों में आपसी समन्वय एवं विश्वास का अभाव है। दक्षिण एशियाई राष्ट्रों का आपसी व्यापार संपूर्ण विश्व व्यापार का लगभग 5ः है ,जबकि अन्य महाद्वीपों एवं राष्ट्रों से शेष 95ः व्यापारिक संबंध रखते हैं। यही कारण है कि इन देशों का पड़ोसी देशों से वैश्विक व्यापार का मात्र 1ः ही निवेश है।
मुख्य शब्द- राष्ट्रवाद, भारतीय विदेशी व्यापार नीति, परिवर्तन, चरण, विश्व, दक्षिण एशिया
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