डिजिटल शासन और भारतीय लोकतंत्रः अवसर, चुनौतियाँ एवं भविष्य की दिशा

DOI- https://doi.org/10.82471/ph1sg-3e932

Authors

  • डा0 अरविन्द कुमार शुक्ल

Abstract

इक्कीसवीं सदी में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने शासन की प्रकृति, स्वरूप तथा कार्यप्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। डिजिटल शासन आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक बन चुका है, जिसके माध्यम से शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, सहभागी एवं प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। भारत में डिजिटल शासन की अवधारणा विशेष रूप से “डिजिटल इंडिया” कार्यक्रम के आरम्भ के पश्चात तीव्र गति से विकसित हुई है। आधार, डिजिटल भुगतान प्रणाली, ई-गवर्नेंस पोर्टल, जनधन योजना, डिजिलॉकर, कोविन, जीएसटी नेटवर्क, ई-कोर्ट्स, ई-पंचायत तथा विभिन्न ऑनलाइन नागरिक सेवाओं ने शासन की प्रक्रिया को नई दिशा प्रदान की है। यह शोध-पत्र भारतीय लोकतंत्र में डिजिटल शासन की भूमिका, प्रभाव, अवसरों एवं चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल शासन ने प्रशासनिक दक्षता, सेवा वितरण, पारदर्शिता तथा नागरिक सहभागिता को सुदृढ़ किया है। साथ ही डिजिटल विभाजन, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता तथा तकनीकी असमानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है तथा गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-पद्धति का उपयोग किया गया है।
मुख्य शब्द- डिजिटल शासन, भारतीय लोकतंत्र, ई-गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया, नागरिक सहभागिता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, डिजिटल विभाजन।

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Published

31.05.2026

How to Cite

डा0 अरविन्द कुमार शुक्ल. (2026). डिजिटल शासन और भारतीय लोकतंत्रः अवसर, चुनौतियाँ एवं भविष्य की दिशा: DOI- https://doi.org/10.82471/ph1sg-3e932. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 2(05), 48–68. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/134

Issue

Section

RESEARCH PAPERS