ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में लैंगिक असमानता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21097217

Authors

  • दीपिका श्रीवास्तव

Abstract

भारत जैसे विकासशील देश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति समाज के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता और पहुँच सामाजिक समानता एवं न्याय के मूल सिद्धान्तों से जुड़ी हुई है। ग्रामीण भारत की लगभग 67-72 प्रतिशत जनसंख्या आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर है किन्तु इन सेवाओं के वितरण में लैंगिक असमानता एक गंभीर समस्या के रूप में पितृसत्तात्मक संरचना, अशिक्षा, गरीबी, सामाजिक रूढ़िवादिता एवं सांस्कृतिक मान्यताएँ महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को सीमित करती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलायें अक्सर स्वास्थ्य सम्बन्धी निर्णयों में पिछड़ी रहती हैं और उन्हें स्वास्थ्य सुविधायें समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती। इसका परिणाम मातृ मृत्युदर, शिशु मृत्युदर, कुपोषण, प्रसव सम्बन्धी जटिलताओं एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आता है।
स्वास्थ्य सेवा में लैंगिक समानता का तात्पर्य केवल महिलाओं को समान उपचार उपलब्ध कराने से नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करने से है कि समाज के सभी वर्गों विशेषकर महिलाओं, किशोरियों और वृद्ध महिलाओं को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवायें प्राप्त हों। ग्रामीण भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में स्वास्थ्य सेवायें अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। परन्तु आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। सीमित संसाधन स्वास्थ्य कर्मियों की अवसंरचना की कमजोर स्थिति तथा जागरूकता की कमी इस समस्या और भी गहरा बनाती है।
ग्रामीण भारत में लैंगिक असमानता केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न भी है। महिलाओं की शिक्षा आर्थिक स्वतंत्रता एवं सामाजिक स्थिति में सुधार लाए बिना स्वास्थ्य समानता संभव नहीं है। सरकार को न केवल योजनायें बनानी चाहिए बल्कि उनके क्रियान्वयन में भी लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करनी होगी। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और पहुँच में गहरी लैंगिक असमानता देखी जाती है। महिलायें, विशेष रूप से गरीब और अशिक्षित वर्गों से आने वाली स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाओं से वंचित रहती हैं। यह अध्ययन ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच उपयोग और परिणामों में मौजूद लैंगिक विषमताओं का विश्लेषण करता है।
मुख्य शब्द- ग्रामीण, स्वास्थ्य, लैंगिक, समानता, संवेदनशीलता।

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Published

30.06.2026

How to Cite

दीपिका श्रीवास्तव. (2026). ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में लैंगिक असमानता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन: DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21097217. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 2(06), 42–48. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/132

Issue

Section

RESEARCH PAPERS