सतत् कृषि के माध्यम से हरित विकासः विकसित भारत 2047 के लिए भारत की रणनीतिक दृष्टि

DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21096771

Authors

  • डॉ0 संदीप सिंह वर्मन, कान्ता प्रसाद

Abstract

भारतीय कृषि प्रणाली वर्तमान में तेजी से सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तनों का सामना कर रही है। जलवायु परिवर्तन, तापमान में वृद्धि और वर्षा की अस्थिरता का कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। प्ब्।त् के कार्यक्रम ष्जलवायु परिवर्तन प्रतिरोधी कृषि के लिए राष्ट्रीय नवाचारष् के अनुसार, देश के 651 कृषि जिलों में से 573 जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हैं। इनमें से 201 अत्यंत संवेदनशील और 109 अत्यधिक संवेदनशील हैं।1 यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीली कृषि नीतियों को लागू करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद  की 2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जैविक कृषि, कृषि भूमि के केवल 2ः भाग को ही कवर करती है।2 इससे हमें स्थायी कृषि पद्धतियों के विकास की पर्याप्त संभावनाएँ दिखाई देती हैं। भारत सरकार की पहले, जैसे कि राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन, पीएम-कुसुम कार्यक्रम और डिजिटल कृषि मिशन (2024), जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में संसाधनों की दृष्टि से किफायती, हरित और बुद्धिमान कृषि का पक्षधर हैं। थ्।व् और विश्व बैंक की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि भारत अपने कृषि निवेश को सकल घरेलू उत्पाद के 2ः तक लाने में सफल हो जाता है, तो यह न केवल दीर्घकालिक रूप से खाद्य सुरक्षा की गारंटी देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।3 यह शोध 2047 तक विकसित भारत के उद्देश्य के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें स्थिरता, संसाधन दक्षता, जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियाँ और सामाजिक समावेशन प्रमुख स्तंभ हैं। इस परिप्रेक्ष्य में, भारत में कृषि क्षेत्र एक स्वायत्त और हरित विकास की नींव बन सकता है।
मुख्य शब्द- सतत् कृषि, हरित विकास, कृषि नीति, संसाधन दक्षता, सामाजिक समावेशन, विकसित भारत 2047

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Published

30.06.2026

How to Cite

डॉ0 संदीप सिंह वर्मन, कान्ता प्रसाद. (2026). सतत् कृषि के माध्यम से हरित विकासः विकसित भारत 2047 के लिए भारत की रणनीतिक दृष्टि: DOI- https://doi.org/10.5281/zenodo.21096771. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 2(06), 17–23. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/130

Issue

Section

RESEARCH PAPERS