विकसित भारत @ 2047: लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की रणनीति
https://doi.org/10.5281/zenodo.20465312
Abstract
विकसित भारत / 2047 के लक्ष्य में 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसमें आर्थिक विकास, सामाजिक समानता, पर्यावरण स्थिरता और सुशासन जैसे कई पहलू शामिल हैं। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य आर्थिक विकास और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। भारत का सपना 2047 तक एक विकसित और आत्म निर्भर राष्ट्र बनने का है, जब हमारी आजादी के 100 वर्ष पूर होंगे। इसके लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लक्ष्य निर्धारित किए हैं, इनमें से एक महत्वपूर्ण लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद ;ळक्च्द्ध में वृद्धि करना है। भारत का लक्ष्य अपने ’’विकसित भारत / 2047’’ विजन के तहत 2047 तक अपनी जी0डी0पी0 को 3.4 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 30 ट्रिलियन डॉलर करना है। इसके अतिरिक्त सरकार ने सतत् विकास लक्ष्य भी अपनायें हैं, जिसमें गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, जलवायु परिवर्तन से निपटना आदि शामिल है। भारत के प्रधानमंत्री (श्री नरेन्द्र मोदी) ने 77वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2023) के अवसर पर देश को सम्बोधित करते हुए घोषणा की थी कि वर्ष 2047 तक, जो भारत की स्वतंत्रता का 100वाँ वर्ष होगा, भारत विकसित देश का दर्जा प्राप्त कर लेगा।
लैंगिक समानता का अर्थ है कि महिलाओं, पुरूषों और अन्य लिंगों के सभी लोगों को जीवन के हर क्षेत्र में समान अधिकार, अवसर और व्यवहार सुनिश्चित करना, इसमें शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और संसाधनों तक समान पहुंच शामिल है। लैंगिक समानता एक मुख्य मानवाधिकार है। वैश्विक स्तर पर, लैंगिक समानता हासिल करने के लिए महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करना भी जरूरी है, जिसमें महिला हत्या, यौन तस्करी, युद्धकालीन यौन हिंसा, लैंगिक वेतन अन्तर और अन्य उत्पीड़न की रणनीतियाँ शामिल हैं। महिला सशक्तिकरण का अर्थ है कि महिलाओं को शक्तिशाली बनाना। इसका तात्पर्य यह है कि महिलाएँ समाज में शक्तिहीन हैं, इसलिए इन्हें शक्तिशाली बनाना। भारतीय सन्दर्भ मंे महिलाओं को पुरूषों की बराबरी पर लाना। महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता, पिछले दशकों में सम्पूर्ण विश्व ने महसूस किया। महिला सशक्तिकरण की पहल सन् 1985 में महिला अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन, नैरोबी में की गयी। महिला सशक्तिकरण से आशय उन सामान्य अर्थों से लगाया जाता है जो अपनी क्षमताओं और शक्तियों का पूर्ण रूप से उपयोग कर सके, जिसमें वे स्वयं निर्णय लेने की स्थिति में आ जायें, ये स्थिति प्रत्येक क्षेत्र में हो सकती है।
स्त्री आज के बदलते परिवेश में जिस तरह पुरूष वर्ग के साथ कंधे से कंधे मिलाकर प्रगति की ओर अग्रसर हो रही है, वह समाज के लिए एक गर्व और सराहना की बात है, विश्व भर की महिलाओं की स्थिति को सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने वर्ष 1975 को अन्तर्राष्ट्रीय महिला वर्ष ;प्दजमतदंजपवदंस ॅवउमद ल्मंत 1975द्ध घोषित किया था। पितृसत्तात्मक मानसिकता के चलते भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज हत्या, यौन शोषण, यौन हिंसा और अनैतिक देह व्यापार जैसे अत्याचार हमारे समाज में अवरोध पैदा कर रहे हैं।
मुख्य शब्द- महिला, पुरूष, लैंगिक समानता, सशक्तिकरण, भेदभाव, शैक्षिक स्तर, सामाजिक-आर्थिक स्तर, भारत
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