लैगिंक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भारतीय महिलायें

https://doi.org/10.5281/zenodo.20437994

Authors

  • डॉ. अनुपम सिंह

Abstract

भारतीय समाज में वैदिक काल से ही महिलाओं का सम्मान प्राप्त होता रहा है। वैदिक काल को स्वर्ण काल कहा जाता है। इसमें महिलाओं की स्थिति अत्यन्त उच्च थी। इसमें थोड़ी-थोड़ी गिरावट उत्तर वैदिक काल से प्रारम्भ हुई। स्मृति युग, मध्यकालीन युग व आजादी से पहले के बिट्रिश काल में महिलाओं की स्थिति में गिरावट होती चली आई। यद्यपि इसके लिए विभिन्न समाज सुधारकों नें प्रयास किए और ऐसी महिलायें हुई जिन्होंनें सनातन सभ्यता और संस्कृति का परचम फहराये रखा। बिट्रिश काल के समय से वर्तमान दौर तक तमाम समाज सुधारकों व विभिन्न सांवैधानिक प्रावधानों, केन्द्र व राज्य सरकारों, गैर सरकारी संगठनों के प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्य काल में हुई गिरावट से उबरकर वैदिक काल जैसे स्वर्णिम युग की तरफ भारत लौट रहा है। लैंगिक असमानता को दूर कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में भारत के कदम बढ़ते जा रहे हैं।
बीज शब्द - संविधान, लैंगिक समानता, सशक्तिकरण, सनातन संस्कृति, संवैधानिक प्रावधान

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Published

30.04.2026

How to Cite

डॉ. अनुपम सिंह. (2026). लैगिंक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भारतीय महिलायें: https://doi.org/10.5281/zenodo.20437994. Research Work (a Monthly, Open Access, Peer Reviewed International Journal) EISSN 3139-2377, 2(04), 1–8. Retrieved from https://journalresearchwork.ijarms.org/index.php/rahul/article/view/112

Issue

Section

RESEARCH PAPERS